
उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी मंदिर के प्रारूप के तौर पर तैयार किया जाएगा सोनापुर काली पूजा पंडाल।
राज कुमार साह (राजू ) । 250 साल पुराना
इतिहास है सोनापुर के ऐतिहासिक काली मंदिर का। काली पूजा शुरू होने से तकरीबन एक माह पूर्व से तैयारी शुरू हो जाती है पंडाल की जहां बंगाल से सभी कारीगर को लाया है जो पूजा पंडाल का प्रारूप तैयार करते हैं। नरपतगंज प्रखंड अंतर्गत सोनापुर पंचायत जहां प्रत्येक साल धूमधाम से काली पूजा का आयोजन किया जाता है जहां पूजा पंडाल की सुंदरता देखते ही बनती है। इस बार पूजा पंडाल की ऊंचाई 101 फीट रखी गई है जो पूजा पंडाल को एक विशेष आकृति देता है।
मंदिर का इतिहास काफी पुराना है जानकार बताते हैं की यहां जो भी श्रद्धालु अपनी श्रद्धा से देवी की आराधना करते हैं उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। स्थानीय ग्रामीण मंदिर के इतिहास के बारे में बताते हैं की मंदिर का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बड़ा है दिलचस्प है। कुछ वर्ष पहले इस मंदिर में बली की प्रथा थी लेकिन स्थानीय संत जिनका नाम सिया शरण दास था , बताया जाता है उन्होंने अपनी गर्दन को बली की वेदी पर रख दिया और उन्होंने कहा कि किसी भी निरीह प्राणी की बलि देने से पहले तुम मेरी बलि चढ़ाओ फिर इस निरीह प्राणी की बलि देना कहा जाता है कि उसी दिन से इस मंदिर के प्रांगण में बली की प्रथा समाप्त हो गई। तीन दिनों तक चलने वाले इस पूजा में बाहर से भी काफी श्रद्धालु आते हैं पड़ोसी राज्य नेपाल से भी श्रद्धालु इस मंदिर में माता के दर्शन को आते हैं स्थानीय ग्रामीण भी उत्सुकता के साथ मंदिर के सभी कार्यों में अपना हाथ बताते हैं। पूजा के दो दिन पश्चात मंदिर प्रांगण के समीप जागरण का कार्यक्रम रखा गया है। कोषाध्यक्ष धीरेंद्र कुमार साह अध्यक्ष ललित कुमार भगत और मंदिर के सचिव विश्वनाथ भगत ने बताया कि इतने बड़े पूजा को सफल बनाने में मंदिर के कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका अहम होती है वे दिन-रात एक कर मंदिर के सभी कार्यों में अपना हाथ बंटाते हैं और इस बड़े कार्यक्रम को जिला स्तरीय भक्ति कार्यक्रम को सफल बनाने में पुरजोर मदद पहुंचाते हैं।
